CM डॉ. मोहन यादव बोले – MP बना देश का ‘चीता स्टेट’, अब 57 पहुंची चीतों की संख्या MohanYadav
श्योपुर 11 मई 2026 CrimeNationalNews
मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित Kuno National Park में रविवार को वन्यजीव संरक्षण के इतिहास का एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कूनो के खुले जंगल में दो मादा चीतों को रिलीज कर ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई उड़ान दे दी।
चीतों के बाड़े से बाहर निकलते ही दोनों मादा चीते तेज रफ्तार से जंगल की ओर दौड़ पड़ीं। इस रोमांचक पल के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि “मध्यप्रदेश की धरती ने चीतों को अपने परिवार का हिस्सा बना लिया है। प्रोजेक्ट चीता अब सिर्फ वन्यजीव संरक्षण नहीं, बल्कि देश के गौरव का प्रतीक बन चुका है।”
MP बना ‘चीता स्टेट’, दुनिया देख रही कूनो मॉडल
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विजन से शुरू हुई चीता पुनर्स्थापना परियोजना लगातार सफलता की नई इबारत लिख रही है।
उन्होंने कहा कि अब मध्यप्रदेश देशभर में “चीता स्टेट” के रूप में पहचान बना चुका है। वर्तमान में देश में चीतों की कुल संख्या 57 हो चुकी है, जिनमें 54 चीते कूनो नेशनल पार्क और 3 गांधी सागर अभ्यारण्य में मौजूद हैं। KunoNationalPark
मुख्यमंत्री ने कहा कि कूनो का इको-सिस्टम अब चीतों के लिए पूरी तरह अनुकूल साबित हो रहा है। कई चीते राजस्थान सहित अन्य इलाकों तक विचरण कर रहे हैं, जो इस परियोजना की सफलता का बड़ा संकेत है।
बोत्सवाना से आए थे 9 चीते, अब 2 खुले जंगल में आजाद
वन विभाग के अनुसार इसी वर्ष फरवरी के अंत में बोत्सवाना से 9 नए चीते भारत लाए गए थे, जिनमें 6 मादा और 3 नर शामिल थे। सभी चीतों को पहले क्वारंटीन किया गया, फिर छोटे बाड़ों में रखकर स्थानीय वातावरण के अनुरूप तैयार किया गया। ProjectCheetah
इन्हीं में से दो मादा चीतों को रविवार को खुले जंगल में छोड़ा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना से आए चीते ज्यादा जेनेटिक विविधता लेकर आए हैं, जिससे भारत में स्वस्थ और दीर्घकालिक चीता आबादी विकसित करने में मदद मिलेगी।
कूनो बना वाइल्डलाइफ का ग्लोबल मॉडल SheopurNews
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश अब धर्म, निवेश और जैनेटिक जैव विविधता का बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से लाए गए चीतों का सफल पुनर्वास दुनिया के लिए उदाहरण बन गया है। CheetahInIndia
उन्होंने वन विभाग, मेडिकल टीम, स्थानीय ग्रामीणों और अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि “चीतों और इंसानों के बीच सह-अस्तित्व का ऐसा मॉडल दुनिया में कम देखने को मिलता है।”
सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर Sheela Dahima, पुलिस अधीक्षक Sudhir Kumar Agrawal, डीएफओ R Thirukural सहित वन एवं प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।
इस मौके पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री Rakesh Shukla, वन विकास निगम अध्यक्ष Ramnivas Rawat, भाजपा जिला अध्यक्ष Shashank Bhushan समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। BreakingNews
कब-कब भारत आए चीते? WildlifeIndia
- 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते भारत लाए गए
- वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते पहुंचे
- फरवरी 2026 में बोत्सवाना से 9 नए चीते कूनो लाए गए
- अब कुल संख्या बढ़कर 57 हो चुकी है
‘प्रोजेक्ट चीता’ से क्या बदलेगा? MPNews
विशेषज्ञों के मुताबिक प्रोजेक्ट चीता सिर्फ वन्यजीव संरक्षण नहीं बल्कि भारत के जंगलों में जैव विविधता संतुलन का बड़ा अभियान है। आने वाले समय में कूनो के साथ गांधी सागर और नौरादेही अभ्यारण्य में भी चीतों को बसाने की तैयारी चल रही है। CheetahState
कूनो अब सिर्फ श्योपुर की पहचान नहीं, बल्कि भारत की वाइल्डलाइफ क्रांति का नया चेहरा बन चुका है।
अब खुले जंगल में घूमेंगे और 2 चीते, सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- ‘प्रोजेक्ट चीता’ में रोज कीर्तिमान रच रहा एमपी
– मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया कूनो नेशनल पार्क का भ्रमण
– प्रदेश के मुखिया ने बाड़े से आजाद किए दो मादा चीते
– अब देश में चीतों की संख्या हुई 57
– प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सफलता से आगे बढ़ रही चीता परियोजना
दिनांक 11/5/26 भोपाल/श्योपुर।
मध्यप्रदेश वाइल्डलाइफ के लिए 11 मई का दिन खास रहा। दो और चीते अपने बाड़े से निकल कर खुले जंगल में पहुंच गए। अब दोनों प्रदेश के साथ-साथ दूसरे राज्यों के इको-सिस्टम को मजबूत करने में सहयोग करेंगे। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क पहुंचे। उन्होंने यहां दो मादा चीतों को बाड़े से मुक्त कर दिया। बाड़े से निकलते ही दोनो चीते उछलते-कूदते जंगल की ओर चले गए।
इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती ने चीतों को अंगीकृत कर अपने परिवार का हिस्सा बनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगभग साढ़े तीन वर्ष पूर्व कूनो में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी। भारत में चीता पुनःस्थापना की यह परियोजना सफलता के साथ आगे बढ़ रही है। चीता पुनर्विस्थापन के इस महत्वपूर्ण कार्य में मध्यप्रदेश नित नए कीर्तिमान रच रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश धर्म, निवेश एवं जैनेटिक जैव विविधता के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना से लाए गए चीतों के पुनर्स्थापन को निरंतर सफलता मिल रही है। आज प्रदेश ने देश में चीता स्टेट के रूप में पहचान बनाई है। वर्तमान में चीतों की संख्या 57 है, जिनमें से 54 कूनो नेशनल पार्क में और 03 गांधी सागर अभ्यारण्य में हैं।
मध्यप्रदेश ने बनाया एक नया इतिहास
भ्रमण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से कहा कि मध्यप्रदेश ने एक नया इतिहास बनाया है। हमने आज कूनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से लाए गए दो मादा चीतों को छोड़ा है। हमने सह-अस्तित्व की भावना प्रकट करते हुए दोनों को खुले जंगल में, खुले वातावरण में प्रकृति के साथ रहने के लिए छोड़ा है। मैं श्योपुर और चंबल के क्षेत्र के लोगों को बधाई देता हूं। इन चीताों का बसेरा अब 5 हजार किमी में हुआ है। हमारे लिए गौरव की बात है कि अब ये हमारे साथ परिवार की तरह रहने लगे हैं। हमें पता ही नहीं चलता कि कब हमारा चीता दौड़ते-दौड़ते राजस्थान पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि चीते चंबल के इलाकों ग्वालियर-शिवपुरी-राजगढ़ सहित कई इलाकों में दस्तक दे रहे हैं। हमें इन चीतों के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी सौगात दी है। मैं केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को भी बधाई देता हूं। मैं उन सभी अधिकारियों को बधाई देता हूं, जिन्होंने प्रोजेक्ट चीता के लिए अथक पसीना बहाया है। उन्होंने कहा कि कूनो नेशनल पार्क प्रोजेक्ट चीता का नया रिकॉर्ड बना रहा है। हमारे फॉरेस्ट के अधिकारी, मेडिकल स्टाफ के लोग, यहां के संरक्षक, स्थानीय जनों और चीतों ने एक-दूसरे को परिवार मान लिया है। यह विश्व की अनूठी घटना है। यह फॉरेस्ट विभाग के लिए गौरव की बात है। चीते जीवन बिताने के लिए इस माहौल में ढल गए हैं। यह इको-सिस्टम के लिए अच्छा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को जो चीते मिले थे, धीरे-धीरे हम उनको खुले वातावरण में छोड़ रहे हैं। हम जीयो और जीने-दो के सिद्धांत पर विश्वास करते हैं।
वाइल्डलाइफ में जुड़ा अहम अध्याय
गौरतलब है कि, इसी साल फरवरी के अंत में बोत्सवाना से 9 नए चीते कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे। इनमें 6 मादा और 3 नर शामिल हैं। यहां लाने के बाद इन सभी को क्वारंटीन किया गया था। क्वारंटीन की अवधि पूरी करने के बाद सभी को छोटे बाड़ों में रखा गया। इससे वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढल गए। इन्हीं 9 में से 2 चीतों को आज खुले जंगल में छोड़ा गया है। इन चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई गति मिलेगी। इससे भारत की वाइल्डलाइफ के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ेगा।
ज्यादा जेनेटिक विविधता लेकर आए बोत्सवाना की चीते
वाइल्डलाइप एक्सपर्ट्स का मानना है कि बोत्सवाना से लाए गए चीते ज्यादा जेनेटिक विविधता लेकर आए हैं। इनसे कूनो में चीतों की स्वस्थ और दीर्घकालिक आबादी विकसित करने में मदद मिलेगी। एक्सपर्ट्स ने यह भी उम्मीद जताई है कि ये चीते कूनो के वातावरण में तेजी से घुल-मिल जाएंगे। इन चीतों को गांधी सागर और नौरादेही जैसे अन्य अभ्यारण्यों में भी बसाने की तैयारी की जा रही है।
कब-कब कहां-कहां से लाए गए चीते
इन चीतों के साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या 57 हो गई है। बता दें, नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को 8, वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे। बोत्सवाना से आए चीतों को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के माध्यम से ग्वालियर लाया गया था। यहां से उन्हें हेलीकॉप्टर द्वारा कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया। प्रोजेक्ट चीता का उद्देश्य प्रदेश से लुप्त हुये चीतों की प्रजाति को पुनर्स्थापित करना, उनकी संख्या में वृद्धि करना और उन्हें स्वतंत्र रूप से शिकार और विचरण के लिए तैयार करना है।
